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यह ज़ियारत अस्ल में वह तोह़फ़ए सलाम है और वह नज़्रे अक़ीदत है जिसको हज़रते इमामे ज़माना साहेबुल अम्र (अ.) ने अपने जद्दे मज़लूम हज़रत इमाम हुसैन (अ.) की बारगाह में पेश किया है और बउनवाने सलाम अपने जद्दे मज़लूम का मरसिया कहा है और उनके दिल को तड़पा देनेवाले मसाएब का तज़केरा कर के नौहा किया है. इस ज़ियारत की जलालत और अज़मत की ज़मानत के लिए यही काफ़ी है कि यह हज़रते इमामे ज़मान, हुज्जते ख़ुदा, कलेमतुल्लाहील बाक़ीया के कलेमात हैं. ख़ुदा वन्दे आ़लम नव्वाबे अरबाअ और उन तमाम उलमाए रूहानी की क़ब्रों और रूहों पर अपनी रहमतें नाज़िल करे कि जिन के ज़रिए यह ज़ियारते नाहीया जैसी नेअमत आज हमारे पास मौजूद है.

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

ज़ियारते नाह़ीया

सलाम हो ख़ल्के खु़दा में मुन्तख़ब रोज़गार नबी-ए-आदम पर,

सलाम हो अल्लाह के वली और उसके नेक बन्दे शीस पर,

सलाम हो खुदा के दलीलों के मज़हर इदरीस पर,

सलाम हो नूह पर, अल्लाह ने जिन की दुआ़ क़ुबूल की,

सलाम हो हूद पर, जिनकी मुराद अल्लाह ने पूरी की,

सलाम हो स्वालेह पर, जिनकी अल्लाह ने अपने लुत्फे़ ख़ास से रहबरी की,

सलाम हो इब्राहीम ख़लील पर, जिन्हे अल्लाह ने अपनी दोस्ती के ख़िल्अत से आरास्ता फ़रमाकर चुना,

सलाम हो फ़िदया राहे हक़ इस्माईल पर, जिन्हे अल्लाह ने जन्नत से ज़िब्हे अज़ीम का तोहफ़ा भेजा,

सलाम हो इस्हाक़ पर, जिनकी ज़ुर्रीयत में अल्लाह ने नुबुव्वत क़रार दी,

सलाम हो याकूब पर, जिनकी बीनाई अल्लाह की रहमत से वापस आगई,

सलाम हो यूसुफ पर, जो अल्लाह की बुजु़र्गी के तुफ़ैल कुएँ से रिहा हुए,

सलाम हो मूसा पर, जिन के लिए अल्लाह ने अपनी क़ुदरते ख़ास से दरिया में रास्ते बना दिये,

सलाम हो हारून पर, जिन्हे अल्लाह ने अपनी नुबुव्वत के लिए मख़सूस फ़रमाया,

सलाम हो शोऐब पर, जिन्हे अल्लाह ने उनकी उम्मत पर नुसरत दे कर सरफ़राज़ किया,

सलाम हो दाऊद पर, जिनकी तौबा को अल्लाह ने शर्फे़ क़ुबुलीय्यत अता किया,

सलाम हो सुलैमान पर, जिनके सामने अल्लाह की इज़्ज़त के तुफै़ल जिन्नों ने सर झुकाया,

सलाम हो अय्यूब पर, जिनको अल्लाह ने बिमारी से शफा दी,

सलाम हो यूनुस पर, जिनके वायदे को अल्लाह ने पूरा किया,

सलाम हो उज़ैर पर, जिनको अल्लाह ने दोबारा ज़िन्दगी अता फरमाई,

सलाम हो ज़करिया पर, जिन्होने सख़्त आज़माइश में भी सब्र से काम लिया,

सलाम हो याहया पर, जिन्हे अल्लाह ने शहादत से सरबलन्द किया,

सलाम हो ईसा पर, जो अल्लाह की रूह और उसका पैग़ाम है,

सलाम हो मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.) पर, जो अल्लाह के हबीब और उसके मुन्तखब बन्दे हैं,

सलाम हो अमीरल मोअमेनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालीब (अ.स.) पर, जिन्हे नबी (स.अ.) के कुव्वते बाज़ु होने का शरफ़ हासिल है,

सलाम हो रसूल की एक-लौती बेटी फ़ातेमा (स.) पर,

सलाम हो इमामे हसन (अ.) पर, जो अपने बाबा की अमानतों के रखवाले उन के जानशीन हैं,

सलाम हो इमामे हुसैन (अ.) पर, जिन्होने इन्तहाई खुलूस से राहे खुदा में जान निसार कर दी,

सलाम हो उस पर, जिसने पोशीदा और नुमाया छुपकर आशकार अल्लाह की इताअत व बन्दगी की,

सलाम हो उस पर, जिस के कब्र की मिट्टी ख़ाके शिफ़ा है,

सलाम हो उस पर, जिस के हरम की फ़िज़ा में दुआएँ क़ुबूल होती हैं,

सलाम हो उस पर, कि सिलसिला-ए-इमामत उस की ज़ुर्रीयत से है,

सलाम हो पीसरे ख़त्मी मर्तबत पर,

सलाम हो सय्यदुल अवसिया के फ़र्ज़न्द पर,

सलाम हो फ़ातेमा ज़हरा (स.) के बेटे पर,

सलाम हो ख़दीजतुल कुब्रा के नवासे पर,

सलाम हो सिद्रतुल मुन्तहा के वारिस व मुख़्तार पर,

सलाम हो जन्नतुल मावा के मालिक पर,

सलाम हो ज़म-ज़म व सफ़ावाले पर,

सलाम हो उस पर जो ख़ाक व ख़ून में ग़लता (डूबा) हुआ,

सलाम हो उस पर जिसकी सरकार लूटी गई,

सलाम हो किसावालों की पांचवीं शख्सीयत पर,

सलाम हो सब से बड़े परदेसी पर,

सलाम हो सरवरे शहीदा पर,

सलाम हो उस पर, जो बे नंग व नाम लोगों के हाथों शहीद हुआ.

सलाम हो करबला में आकर बसने वाले पर,

सलाम हो उस पर, जिन पर फ़रिश्ते रोए,

सलाम हो उस पर, जिस की ज़ुर्रीयत पाको पाकीज़ा है,

सलाम हो दीन के सैय्यद व सरदार पर,

सलाम हो उन पर, जो दलाएल व बराहीन (दलील) की आमज-गाह (मन्ज़िल है),

सलाम हो उन पर, जो सरदारों के सरदार इमाम हैं,

सलाम हो चाक गिरेबानों पर,

सलाम हो मुरझाए हुए होटों पर,

सलाम हो कर्ब अन्दोह (रंजो-ग़म) में घिरे हुए चूर-चूर नुफ़ूस पर,

सलाम हो उन रूहों पर, जिनके जिस्मों को धोके से तहे तेग़ किया गया,

सलाम हो बे गोरो-कफ़न जिस्मों पर,

सलाम हो उन जिस्मों पर, धूप की शिद्दत से जिनके रंग बदल गए,

सलाम हो ख़ून की उन धारों पर, जो करबला के दामन में जज़्ब हो गई,

सलाम हो बिखरे हुए आज़ा पर,

सलाम हो उन सरों पर, जिन्हे नैज़ों पर बलन्द किया गया,

सलाम हो उन मुखद्दरात इस्मत (पाक बीबीयों) पर, जिन्हे बेरिदा फिराया गया,

सलाम हो दोनों जहानों के पालनहार के हुज्जत पर,

सलाम हो आप पर और आपके पाको-पाकीज़ा आबाओ अजदाद पर,

सलाम हो आप और आपके शहीद फ़र्ज़न्दों पर,

सलाम हो आप और आपकी नुसरत करनेवाली ज़ुर्रीयत पर,

सलाम हो आप और औपकी कब्र के मुजाविर फ़रिश्तों पर,

सलाम हो इन्तेहाई मज़्लूमियत के साथ क़त्ल होनेवाले पर,

सलाम हो आपके ज़हर से शहीद होनेवाले भाई पर,

सलाम हो अली अकबर पर,

सलाम हो कमसिन शीर-ख्वार पर,

सलाम हो उन नाज़नीन जिस्मों पर जिन पर कोई कपड़ा नहीं रहने दिया गया,

सलाम हो आपके दरबदर कीये जानेवाले खानदान पर,

सलाम हो उन लाशों पर, जो सेहराओं में बिखरी रहीं,

सलाम हो उन पर, जिनसे उनका वतन छुड़ाया गया,

सलाम हो उन पर, जिन्हे बगै़र कफ़न के दफ़नाना पड़ा,

सलाम हो उन सरों पर, जिन्हें जिस्मों से जुदा कर दिया गया,

सलाम हो उस पर, जिसने सब्र व शिकाबाई के साथ अल्लाह की राह में जान कुरबान की,

सलाम हो उस मज़लूम पर, जो बे यारो मददगार था,

सलाम हो पाको पाकीज़ा ख़ाक मे बसनेवाले पर,

सलाम हो बलन्द व बाला क़ुब्बा (गुम्बद) वाले पर,

सलाम हो उस पर, जिसे ख़ुदाए बुज़ुर्ग व बरतर ने पाक रखा,

सलाम हो उस पर, जिसकी खिदमत गुज़ारी पर जिब्रईल को नाज़ था,

सलाम हो उस पर, जिसे मिकाईल ने गहवारे में लोरी दी,

सलाम हो जिसके दुश्मनों ने उसके और उसके अहले हरम के सिलसिले में अपने पैमान को तोड़ा,

सलाम हो उस पर, जिसकी हुरमत पामाल हुई,

सलाम हो उस पर, जिसका ख़ून ज़ुल्म के साथ बहाया गया,

सलाम हो ज़ख्मों से नहानेवालों पर,

सलाम हो उस पर, जिसे प्यास की शिद्दत ने नोके सिना के तल्क़ (कड़वे) घूँट पिलाए गए,

सलाम हो उस पर, जिस को ज़ुल्मो सितम का निशाना भी बनाया गया और उसके खयाम के साथ उसके लिबास को लूट लिया गया,

सलाम हो उस पर, जिसे इतनी बड़ी काएनात में यको तनहा छोड़ दिया गया,

सलाम हो उस पर, जिसे यूँ उरियाँ छोड़ा गया जिसकी मिसाल नहीं मिलती,

सलाम हो उस पर, जिसके दफ़्न में बादीयाँ नशिनों ने हिस्सा लिया,

सलाम हो उस पर, जिसकी शहरग़ काटी गई,

सलाम हो दीन के उस नासिरो मददगार पर, जिसने बग़ैर किसी मददगार के दिफाई जंग लढ़ी,

सलाम हो उस रीशे अकदस पर, जो ख़ून से रंगीन हुई,

सलाम हो आप के ख़ाक आलूद रुख़्सारों पर,

सलाम हो लुटे और नुचे हुए बदन पर,

सलाम हो उस दन्दाने मुबारक पर, जिसकी छड़ी से बेहुरमती की गई,

सलाम हो कटी हुई शहरग़ पर,

सलाम हो नैज़े पर, बलन्द किये जानेवाले सरे अकदस पर,

सलाम हो उन मुकद्दस जिस्मों पर जिनके टुकडे सहरा में बिखर गए,

आक़ा । हमारा सलामे नियाज़ व अदब कुबूल फ़रमाइये और आपके क़ुबे (टीले) के गिर्द परवानावार फ़िदा होनेवाले, आपकी तुरबत को हमेशा घेरे रहनेवाले, आपकी ज़रीहे मुकद्दस का हमेशा तवाफ़ करनेवाले और आपकी ज़ियारत के लिए आनेवाले फ़रिश्तों पर भी हमारा सलाम निछावर हो.

आका । मैं आपके हुज़ूर सलामे शौक का हदीया लिये, कामियाबी और कामरानी की आस लगाए हाज़िर हुआ हूँ, आका । ऐसे ग़ुलाम का अक़ीदत से भरपूर सलाम क़ुबूल कीजीए जो आपकी इज़्ज़त व हुरमत से आगाह, आपकी विलायत में मुख़लिस, आपकी मुहब्बत के वसीले से अल्लाह की तकर्रुब (कुरबत) का शयदा (कुरबान होनेवाला) और आपके दुशमनों से बरी व बेज़ार है, आका । ऐसे आशिक का सलाम क़ुबूल फ़रमाइये जिसका दिल आपकी मुसीबतों के सबब ज़ख़्मों से छलनी हो चुका है, और आपकी याद में खू़न के आँसू बहाता है.

आका । इस चाहनेवाले का आदाब क़ुबूल किजीए जो आपके ग़म में निढ़ाल, बेहाल और बेचैन है.

आका । इस जाँनिसार का हदिया-ए-सलाम क़ुबूल कीजीए जो अगर करबला में आपके साथ होता तो आपकी हिफ़ाज़त के लिए तलवारों से टकरा कर अपनी जान की बाज़ी लगा देता, दिलो जान से आप पर फ़िदा होने के लिए मौत से पंचा आज़माई करता, आपके सामने जंगो जिहाद के जौहर दिखाता, आपके ख़िलाफ बग़ावत करनेवालों के मुकाबले में आपकी मदद करता और अन्जाम कार अपना जिस्मो जान, रूहो माल और आल औलाद सब कुछ आप पर कुर्बान कर देता.

आका । इस जाँनिसार का सलाम क़ुबूल किजीए, जिस की रूह आपकी रूह पर फ़िदा हो, और इस के अहलो अयाल आपके अहलो अयाल पर तसद्दुक.

मौला मैं वाक़ए शहादत के बाद पैदा हुआ, अपनी किस्मत के सबब मैं हुज़ूर (अ.स.) की नुसरत से महरूम रहा, आपके सामने मैदाने कारज़ार में उतरनेवालों में शामिल न हो सका और ना ही मैं आपके दुश्मनों से नबर्द आज़मा (जंग न कर सकना) हो सका.

लिहाज़ा । अब मैं कमाले हसरत व अन्दोह के साथ आप पर टूटनेवाले मसाएब व आलाम पर अफ़सोस व मलाल और तपिशे रंजो ग़म के सबब सुबह व शाम मुसलसल गिरिया व ज़ारी करता रहूँगा.

और । आपके ख़ून की जगह इस कद्र ख़ून के आँसू बहाउँगा के अन्जामकार ग़म व अन्दोह की भट्टी और मुसीबतों के लपकते हुए शोलों में जलकर ख़ाक होजाऊँ और यूँ आपके हुज़ूर अपनी जान का नज़राना पेश करदूँ.

आक़ा । मैं गवाही देता हूँ कि आपने नमाज़ क़ायम करने का हक़ अदा फ़रमाया, ज़कात अदा की, नेकी का हुक्म दिया, बुराई और दुशमनी से रोका, दिलो जान से अल्लाह की इतातअत की, पल फर के लिए भी उस की नाफ़रमानी नहीं की, अल्लाह और उसकी रस्सी से यूँ वाबस्ता रहे कि उसकी रज़ा हासिल करली, हमेशा उसके अहकाम की निगेहदाश्त व पासबानी करते रहे, उसकी आवाज़ पर लब्बैक कही, उसकी सुन्नतों को क़ायम किया, फ़ितनों की भड़कती हुई आग को बुझाया, लोगों को हक़ व हिदायत की तरफ़ बुलाया, उनके लिये हिदायत के रास्तों को रौशन व मुनव्वर कर के वाज़ेह किया और आपने अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने का हक़ अदा कर दिया.

आक़ा । मैं दिलो जान से गवाही देता हूँ की आप हमेशा दिल से अल्लाह के फ़र्माबरदार रहे, आप ने हमेशा अपने जद्दे अमजद (स.) की इत्तेबा और पैरवी की, आपने वालिदे माजिद के इरशादात को सुना और उस पर अमल किया, भाई की वसीय्यत की तेज़ी से तकमील की, दीन के सुतून को बलन्द किया, बग़ावतों का क़ला-कमा (तबाहो बरबाद) किया.

और । सरकशों और बाग़ीयों की सरकोबी की (कुचल दिया), आप हमेशा उम्मत के नासे (मददगार) बन कर रहे, आपने जाँनिसारी की सख़्तीयों को सब्रो तहम्मुल और बुर्दबारी से बरदाश्त किया, फ़ासिकों का जमकर मुक़ाबला फ़रमाया, अल्लाह की हुज्जतों को क़ायम किया, इस्लाम और मुसलमानों की दस्तगीरी की, हक़ की मदद की, आज़माइशों के मौक़े पर सब्रो शकीबाई से काम लिया, दीन की हिफ़ाज़त की और हुदूदे दीन की मुहाफ़िज़त फ़रमाई.

आक़ा । मैं अल्लाह के हुज़ूर गवाही देता हूँ कि आपने मिनारा-ए-हिदायत को क़ायम रख्खा, अद्ल की नश्र (फ़ैलाया) व इशाअत की, दीन की मदद करके उसे ज़ाहिर किया, दीन की तज़हीक (मज़ाक) करनेवालों को रोका और उन्हे क़रार वाक़ई सज़ा दी, सुफ़लों (ज़लीलों) से शरीफ़ों का हक़ लेकर उन्हे पहुँचाया.

और । अद्लो इन्साफ़ का हक़ लेकर उन्हे कमज़ोर और ताक़तवरों में बराबरी रवाँ रखी.

आका । मैं इस बात की भी गवाही देता हूँ कि आप यतीमों के सरपरस्त और उनके दिलों की बहार, ख़ल्के खुदा के लिए बहतरीन पनाहगाह, इस्लाम की इज़्ज़त, अहकामे इलाही का मख़ज़न, इनाम व इकराम का मआदन, अपने जद्दे अमजद और वालिदे माजिद के रास्तों पर चलनेवाले और वसीयत व नसीहत में अपने भाई जैसे थे.

मौला । आपकी शान व सिफ़ात यह है कि आप ज़िम्मेदारियों को पूरा करनेवाले, सायेबे औसाफ़े हमीदा, जूदो करम में मशहूर, शब की तारीकीयों में तहज्जुद गुज़ार, मज़बूत रास्तों को इख़्तियार करनेवाले, ख़ल्के खुदा में सबसे ज़्यादा खुबीयों के मालिक, अज़ीम माज़ी के हामिल, आला हसबो नसब वाले, बलंद मरतबों और बेपनाह मनाक़िब का मर्कज़, पसन्दीदह नमूनए अमल के ख़ालिक, मिसाली ज़िन्दगी बसर करनेवाले, बावक़ार, बुर्दबार, बलंद मर्तबा, दरिया दिल, दानाओ व बीना, साहेबे अ़ज़्म व जज़्म, ख़ुदा शनास रहबर, ख़ौफ व ख़शियत और सोज़ो तपिश रखनेवाहे, खुदा को चाहने और उसकी बारगाह में सर झुकानेवाले.

आप । रसूले अक्रम (स.) के फ़र्ज़न्द, क़ुरआन के बचानेवाले, उम्मत के मददगार, इताअते इलाही में जफ़ा कश, अहद व मीसाक़ के पाबन्द व मुहाफ़िज़, फ़ासिकों के रास्तों से दूर रहनेवाले, हुसूले मक़सद के लिए दिलो जान की बाज़ी लगानेवाले और तूलानी रूकूअ व सुजूद अदा करनेवाले हैं.

मौला । आपने दुनिया से इस तरह मुँह मोड़ा और यूँ बेएतेनाई दिखाई जैसे दुनिया से हमेशा के लिए कूच करनेवाले करते हैं. दुनिया से खौफ़ज़दा लोग उसे देखते हैं, आपकी तमन्नाएँ और आरज़ूएँ दुनिया से हटी हुई थी, आपकी हिम्मत व कोशिश उसकी ज़ीनतों से बेनियाज़ थी और आपने तो दुनिया के चेहरे की तरफ़ कभी उचटती हुई निगाह भी नही डाली.

अलबत्ता । आखेरत में आपकी दिलचस्पी शोहरे आफ़ाक है, यहाँ तक की वह वक़्त आया जब जौरो सितम ने लम्बे-लम्बे डग भर कर सरकशी शुरू करदी, ज़ुल्म तमामतर हथीयार जमा करके सख़्त जंग के लिए आमादा हो गया और बाग़ीयों ने अपने तमाम साथियों को बुला भेजा. उस वक़्त आप, अपने जद के हरम में पनाहगुज़ी ज़ालिमो से अलग-थलग, मस्जिदों – मेहराब के साये में लज़ज़्त और ख्वाहिशात से बेज़ार बैठे थे. आप अपनी ताकत और इमकानात के मुताबिक दिलो ज़बान के ज़रिये बुराइयों से नफ़रत का इज़हार करते और लोगों को बुराइयों से रोकते थे, मगर फिर आपके इ़ल्म का तक़ाज़ा हुआ कि आप खुल्लम-खुल्ला बैअत से इन्कार करें और फुज्जार के ख़िलाफ़ जिहाद के लिए उठ खड़े हों.

चुनांचे आप अपने अहलो-अयाल, अपने शीयों, चाहनेवालों और जाँनिसारों को लेकर रवाना हो गए और अपनी इस मुख़्तसर लेकिन बाअज़्म व हौसला जमाअत की मदद से, हक़ और दलाएल व बराहीन अच्छी तरह वाज़ेह कर दिया लोगों को हिकमत और मुइज़े हसना के साथ अल्लाह की तरफ़ बुलाया, हुदूदे इलाही के क़याम और अल्लाह की इताअत का हुक़्म दिया और लोगों को ख़बाअस व बेहूदगायों और सरकशी से रोका लेकिन लोग जु़ल्मो सितम के साथ आप के मुक़ाबले पर डट गए, ऐसे आड़े वक़्त पर भी, आपने पहले तो उनको ख़ुदा के ग़ज़ब से डराया और उन पर हुज्जत तमाम की फ़िर उन से जिहाद किया. तब उन्होने आप से किया हुआ अहद तोड़ा और आपकी बैअत से निकल कर आपके रब और आपके जद्दे अमजद को नाराज़ किया और आपके साथ जंग शुरू कर दी.

लिहाज़ा आप भी मैदाने कारज़ार में उतर आए, आपने फ़ुज्जार के लश्करों को रौंद डाला, ज़ुल्फ़ेक़ार खेंच कर जंग के गहरे ग़ुबार के बादलों में घुस कर ऐसा हमला किया कि लोगों को अली की जंग याद आगई. दुश्मनों ने आपकी साबित क़दमी, दिलेरी और बेबाकी (निडरता) देखी तो उनका पित्ता पानी हो गया और उन्होने मुक़ाबले के बजाए मक्कारी से काम लिया और आपके क़त्ल के लिए फ़रेब के जाल बिछा दिये और मलऊन उमरे साद ने लशकर को हुक़्म दिया कि वह आप पर पानी बन्द कर दे और आप तक पानी पहुँचाने के तमाम रास्तों की नाकाबन्दी करदे, फिर दुशमन ने तेज़ जंग शुरू करदी और आप पर पय-दर-पय हमले करने लगा जिसके नतीजे में उसने आपको तीरों और नैज़ों से छलनी कर दिया और इन्तहाई दरिन्दगी के साथ आप को लूट लिया. उसने ना तो आपके सिलसिले में किसी अहदो पैमान की परवा की और ना ही आपके दोस्तों के क़त्ल और, आप और आपके अहले-बैत (अ.) का सामान ग़ारत के सिलसिले में किसी गुनाह की फ़िक्र की और आपने मैदाने जंग में सब से आगे बढ़ कर मसाएब व मुश्किलात को यूँ झेला की आसमान के फ़रिश्ते भी आपके सब्र, इस्तेक़ामत पर दंग रह गए, फिर दुश्मन हर तरफ़ से आप पर टूट पड़ा, उसने आपको ज़खमों से चूर-चूर करके निढ़ाल कर दिया और दम लेने तक की फ़ुरसत न दी यहाँ तक की आपका कोई नासिरो मददगार बाक़ी न रहा और आप इन्तेहाई सब्रो शिकाबाई से सब कुछ देखते और झेलते हुए यको तनहा अपनी मुक़द्दराते इस्मतो तहारत और बच्चों को दुशमन के हमले से बचाने में मसरूफ रहे, यहाँ तक कि दुशमन ने आपको घोड़े से गिरा दिया और आप ज़खमों से पाश-पाश जिस्म के साथ ज़मीन पर गिर पड़े फिर वह तलवार लेकर टूट पड़ा और उसने घोड़ों की सुमों से आपको पामाल कर दिया, यह वह वक़्त था जब आपकी जबीने अक़दस पर मौत का पसीना आगया और रूह निकलने के सबब आपका जिस्मे नाज़नीं दाएँ-बाएँ सुकड़ने और फ़ैलने लगा, अब आप इस मोड़ पर थे जहाँ इन्सान सब कुछ भूल जाता है, ऐसे में आपने अपने ख़याम और घर की तरफ़ आखरी बार हसरत भरी निगाह डाली और आपका वफ़ादार घोड़ा तेज़ी से हिनहिनाता और रोता हुआ सुनानी सुनाने के लिए ख़याम की तरफ़ रवाना हो गया.

जब मुक़द्दराते इस्मतो तहारत ने आपके ज़ुहजनाह को ख़ाली और आपकी ज़ीन को उल्टा हुआ देखा तो एक कोहराम मच गया और वह ग़म की ताब न लाते हुए ख़ैमों से निकल आए, उन्हो ने अपने बाल चेहरों पर बिखरा लिए और अपने रुख़्सारों पर तमाचे मारते हुए अपने बुजु़र्गों को पुकार-पुकार कर नौहा व गिरिया शुरू कर दिया क्यूँ कि अब इस संगीन सदमे के बाद उनको इज़्ज़त – एहतेराम की निगाहों से नहीं देखा जा रहा था और सब के सब ग़म से निढ़ाल आपकी शहादतगाह की तरफ़ जा रहे थे.

अफ़सोस । शिम्र मलऊन आपके सीने पर बैठा हुआ और आपके गुलूए मुबारक पर अपनी तलवार रखे हुए था, वह कमीना आपकी रीशे अक़दस को पकड़े हुए अपनी कुन्द तलवार से आपको ज़िब्हा कर रहा था, यहाँ तक कि आपके होशो हवास साकिन होगए, आपकी सांस मध्धम पड़ गई और आपका पाको-पाकीज़ा सर नैज़े पर बलन्द कर दिया गया, आपके अहलो-अ़याल को ग़ुलामों और कनीज़ों की तरह कै़द कर लिया गया और उनको आहनी (लोहे की) ज़ंजीरों में जकड़ कर इस तरह बेकजावा ऊँटों पर सवार कर दिया गया कि दिन की बेपनाह गर्मी उनके चेहरों को झुलसाए दे रही थी. बेग़ैरत दुशमन उनको जंगलों और बियाबानों में ले जा रहा था और उनके नाज़ुक हाथों को गर्दनों के पीछे सख्ती से बांध कर गलियों और बाज़ारों में उनकी नुमाइश कर रहा था.

लानत हो उस फ़ासिक़ गिरोह पर जिसने आपको क़त्ल करके इस्लाम को क़त्ल और नमाज़, रोजे़ को मुअत्तल (ख़त्म) कर दिया. अहकाम व क़वानीने इलाही की नाफ़रमानी की, ईमान की बुनियादों को हिला दिया, आयाते क़ुरआनी में रद्दो बदल की और बग़ावतो दुशमनी की दलदल में धसता ही चला गया.

आपकी शहादत पर अल्लाह का रसूल सरापा दर्द बन गया, किताबे ख़ुदा को कोई पूछनेवाला न रहा, आप पर जफ़ा करनेवालों का हक से रिश्ता टूट गया, आप के उठजाने से तकबीरो तहलील, हरामो हलाल, तन्ज़ीलो तावील पर परदे पड़ गए.

इसके अलावा आपके ना होने से दीन में क्या-क्या बदला गया, कैसे-कैसे तग़य्युरात अमल में लाए गए, मुल्हेदाना (काफ़ेराना) नज़रियों को फ़रोग़ मिला, अहकामे शरीअत मुअत्तल कीए गए, नफ़सानी ख्वाहिशों की गिरिफ़्त मज़बूत हुई, गुमराहियों ने ज़ोर पकड़ा, फितनों ने सर उठाया और बातिल की बन आई फिर हुआ यह की नौहागरों ने आपके जद्दे अमजद की मज़ार पर आहो बुका और गिरियाओ ज़ारी के साथ यूँ मरसिया ख़्वानी की.

अल्लाह के रसूल । आपका बेटा, आपका नवासा क़त्ल कर डाला गया, आपका घर लूट लिया गया, आपकी ज़ुर्रीयत असीर हुई, आपकी इतरत पर बड़ी मुसीबतें पडी. यह सुन कर पैग़म्बर (स.) को बहुत सदमा पहुँचा, रसूल (स.) के जिगर ने ख़ून के आँसू बरसाए, मलाएका ने उन्हें पुर्सा दिया, अम्बिया ने ताज़ीयत की और

मौला । आपकी मादरे गिरामी जनाबे फ़ातेमा ज़हरा (स.) पर क़यामत टूट पड़ी, मलाएका कतार दर कतार आपके वालिदे गिरामी के हुज़ूर ताज़ीयत के लिए आए, आ़ला इल्लीय्यीन (बड़े लोगों) में सफ़्हे मातम बिछ गई, हूरें अपने रुख़्सारों पर तमाचे मार-मार कर निढ़ाल हो गईं, आसमान और आसमानी मख़लूक जन्नत और जन्नत के दरो दीवार, बलन्दीयों और पस्तीयों, समन्दरों और मछलियों, जन्नत के ख़ुद्दाम व सुक्कान, ख़ानए काबा और मकामे इब्राहीम, मशअरुल हराम व हिल्लो हरम सब ने मिल कर आप (अ.) की मुसीबत पर ख़ून के आँसू बहाए.

बारे इलाहा । इस बाबरकत व बाइज़्ज़त जगह के तुफ़ैल मोहम्मद व आले मोहम्मद (स.) पर दुरूद भेज, मुझे इन के साथ मेहशूर फ़रमा और उनकी शिफ़ाअत के सबब मुझे जन्नत अता कर.

बारे इलाहा । ऐ जल्द हिसाब करनेवाले, ऐ सबसे करीम हस्ती और ऐ सबसे बड़े हाकिम, मैं तेरी बारगाह में तमाम जहानों की तरफ़ तेरे रसूल (स.) और आखरी नबी (स.) हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.), इनके भाई, इब्ने अम (चचा के बेटे), तवाना बाज़ू और दानिश व आगही के मरक़ज़ अमीरुल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब (अ.), तमाम जहानों की ख़वातीन की सरदार – हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.), परहेज़गारों के मुहाफ़िज़ इमाम हसन ज़की (अ.), शोहदा के सैय्यदो सरदार – हज़रत अबी अब्दिल्लाह अल-हुसैन (स.) और इनकी मक़तूल औलाद और मज़लूम इतरत, आबिदों की ज़ीनत हज़रत अली बिन हुसैन (अ.) जोयाए हक़ (हक़ को ढूँढने वाले) लोगों के मरकज़े तवज्जोह हज़रत मोहम्मद बिन अली (अ.), सबसे बड़े सादिक़ुल क़ौल हज़रत जाफ़र बिन मोहम्मद (अ.) दलीलों को ज़ाहिर करनेवाले हज़रत मूसा बिन जाफ़र (अ.), दीन के मददगार हज़रत अली बिन मूसा (अ.), पैरोकारों के रेहनुमा हज़रत मोहम्मद बिन अली (अ.) सबसे बड़े पारसा (पाक़) हज़रत अली बिन मोहम्मद (अ.), हिदायतों की मज़बूत कड़ी हज़रत हसन इब्ने अली (अ.) और सिलसिला-ए-नबुव्वत व इमामत के तमाम बुज़ुर्गों के वारिस और ऐ अल्लाह । तेरी तमाम मख़लूक पर तेरी हुज्जत (क्यूँ की यह ज़्यारते नाहीया खुद इमामे ज़माना – अ.त.फ.श. से सादिर हूई है इस लिए आपने ख़ुद अपना नामे नामी नहीं लिया है) का वास्ता देता हूँ कि तू मोहम्मद (स.) व आले मोहम्मद (स.) पर जो आले ताहा व यासीन भी हैं, और सच्चे और नेकू कार भी, दुरूद व रहमत नाज़िल फ़रमा और मुझे रोज़े क़यामत उन लोगों मे शामिल फ़रमा जिनको उस दिन अमन व इत्मेनान हासिल होगा और वह इस परेशानीवाले दिन भी खुश व खुर्रम होंगे और जिन्हे जन्नत की ख़ुशख़बरी सुनाई जाएगी.

बारे इलाहा । ऐ अरहमुर्राहेमीन, अपनी रहमत के सदक़े में मेरा नाम मुसलमानों मे लिख ले, मुझे स्वालेह और नेकू कार लोगों मे शामिल फ़रमाले, मेरे पसमानिन्दगान (गुज़रे हुए) और बादवाली नसलों मे मेरा ज़िक्र सच्चाई और भलाई के साथ जारी रख, बाग़ियों के मुक़ाबले में मेरी नुसरत फ़रमा, हसद करनेवालों के मकरो शर से मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा, ज़ालिमों के हाथों को मेरी जानिब बढ़ने से रोक दे, मुझे आ़ला इल्लीय्यीन में बाबरकत पेशवाओं और अइम्मा-ए-अहलेबैत (अ.) के जवार में उन अम्बिया-ए-सिद्दीक़ीन, शोहदा और सॉलेहीन के साथ जमा कर जिन पर तूने अपनी नेअमतें नाज़िल फ़रमाई हैं.

परवरदिगार । तुझे क़सम है तेरे मासूम नबी की, तेरे हतमी अहकाम की, तेरे मुकर्रहात, मनेअयात की और उस पाको पाकीज़ा कब्र की जिसके पहलू में मासूम, मक़तूल और मज़लूम इमाम दफ़्न हैं, कि तू मुझे दुनिया के ग़मों से निजात अता फ़रमा, मेरे मुक़द्दर की बुराई और शर को मुझ से दूर कर दे और मुझे ज़हरीली आग से बचाले.

बारेइलाहा । तू अपनी नेअमत के तुफ़ैल इज़्ज़तो आबरू मरहमत फ़रमा, मुझे अपनी तक़सीम की हुई रोज़ी पर राज़ी रख, मुझे अपने करमो, जूदो, सख़ा से ढ़ांक ले की फ़ुरसत ना मिले और मुझ पर इतना फ़ज़्लो करम कर कि मैं तमाम मख़लूकात से बेनियाज़ हो जाऊँ. मेरे पालनेवाले, मैं तुझ से नफ़ा बख़्श इल्म, तेरे जानिब झुकनेवाले दिल, पुख़्ता ईमान, पाकीज़ा और मुख़लिसाना अमल, मिसाली सब्र और बेपनाह अज्रो सवाब का तलबगार हूँ.

मेरे अल्लाह । तूने मुझ पर जो फ़रावान नेअमतें नाज़िल फ़रमाई हैं, तूही मुझे उनके बारे में अपने शुक्रो सिपास की तोफ़ीक अता फ़रमा और उसके नतीजे में मुझ पर अपने अहसानो करम में इज़ाफ़ा फ़रमा, लोगों के दरमियान मेरे क़ौल में तासीर अता कर, मेरे अमल को अपनी बारगाह में बलन्दी अता फ़रमा, मुझे ऐसे बना दे कि नेकीयों की पैरवी की जाने लगे और मेरे दुशमन को तबाहो बरबाद कर दे.

ऐ जहानों के पालनेवाले । तू अपने बेहतरीन बन्दों यानी मोहम्मद व आले मोहम्मद (स.) पर शबो रोज़ अपनी रहमतें व दुरूद नाज़िल फ़रमा और मुझे बुरे लोगों के शर से महफ़ूज़ कर दे और गुनाहों से पाक फ़रमा दे, मुझे सुकूनो क़रार की जगह यानी जन्नत में जगह दे और मुझे और मोमेनीन व मोमिनात में से मेरे तमाम भाईयों और बहनों और अइज़्ज़ा व अक़रबा को बख़्श दे.

ऐ सब रहम करनेवालों से ज़्यादा रहम करनेवाले, अपनी रहमत के तसद्दुक मेरी इल्तेजा को क़ुबूल फ़रमा ले.

Edited by Gholam_mahdi

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यह ज़ियारत अस्ल में वह तोह़फ़ए सलाम है और वह नज़्रे अक़ीदत है जिसको हज़रते इमामे ज़माना साहेबुल अम्र (अ.) ने अपने जद्दे मज़लूम हज़रत इमाम हुसैन (अ.) की बारगाह में पेश किया है और बउनवाने सलाम अपने जद्दे मज़लूम का मरसिया कहा है और उनके दिल को तड़पा देनेवाले मसाएब का तज़केरा कर के नौहा किया है. इस ज़ियारत की जलालत और अज़मत की ज़मानत के लिए यही काफ़ी है कि यह हज़रते इमामे ज़मान, हुज्जते ख़ुदा, कलेमतुल्लाहील बाक़ीया के कलेमात हैं. ख़ुदा वन्दे आ़लम नव्वाबे अरबाअ और उन तमाम उलमाए रूहानी की क़ब्रों और रूहों पर अपनी रहमतें नाज़िल करे कि जिन के ज़रिए यह ज़ियारते नाहीया जैसी नेअमत आज हमारे पास मौजूद है.

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

ज़ियारते नाह़ीया

सलाम हो ख़ल्के खु़दा में मुन्तख़ब रोज़गार नबी-ए-आदम पर,

सलाम हो अल्लाह के वली और उसके नेक बन्दे शीस पर,

सलाम हो खुदा के दलीलों के मज़हर इदरीस पर,

सलाम हो नूह पर, अल्लाह ने जिन की दुआ़ क़ुबूल की,

सलाम हो हूद पर, जिनकी मुराद अल्लाह ने पूरी की,

सलाम हो स्वालेह पर, जिनकी अल्लाह ने अपने लुत्फे़ ख़ास से रहबरी की,

सलाम हो इब्राहीम ख़लील पर, जिन्हे अल्लाह ने अपनी दोस्ती के ख़िल्अत से आरास्ता फ़रमाकर चुना,

सलाम हो फ़िदया राहे हक़ इस्माईल पर, जिन्हे अल्लाह ने जन्नत से ज़िब्हे अज़ीम का तोहफ़ा भेजा,

सलाम हो इस्हाक़ पर, जिनकी ज़ुर्रीयत में अल्लाह ने नुबुव्वत क़रार दी,

सलाम हो याकूब पर, जिनकी बीनाई अल्लाह की रहमत से वापस आगई,

सलाम हो यूसुफ पर, जो अल्लाह की बुजु़र्गी के तुफ़ैल कुएँ से रिहा हुए,

सलाम हो मूसा पर, जिन के लिए अल्लाह ने अपनी क़ुदरते ख़ास से दरिया में रास्ते बना दिये,

सलाम हो हारून पर, जिन्हे अल्लाह ने अपनी नुबुव्वत के लिए मख़सूस फ़रमाया,

सलाम हो शोऐब पर, जिन्हे अल्लाह ने उनकी उम्मत पर नुसरत दे कर सरफ़राज़ किया,

सलाम हो दाऊद पर, जिनकी तौबा को अल्लाह ने शर्फे़ क़ुबुलीय्यत अता किया,

सलाम हो सुलैमान पर, जिनके सामने अल्लाह की इज़्ज़त के तुफै़ल जिन्नों ने सर झुकाया,

सलाम हो अय्यूब पर, जिनको अल्लाह ने बिमारी से शफा दी,

सलाम हो यूनुस पर, जिनके वायदे को अल्लाह ने पूरा किया,

सलाम हो उज़ैर पर, जिनको अल्लाह ने दोबारा ज़िन्दगी अता फरमाई,

सलाम हो ज़करिया पर, जिन्होने सख़्त आज़माइश में भी सब्र से काम लिया,

सलाम हो याहया पर, जिन्हे अल्लाह ने शहादत से सरबलन्द किया,

सलाम हो ईसा पर, जो अल्लाह की रूह और उसका पैग़ाम है,

सलाम हो मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.) पर, जो अल्लाह के हबीब और उसके मुन्तखब बन्दे हैं,

सलाम हो अमीरल मोअमेनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालीब (अ.स.) पर, जिन्हे नबी (स.अ.) के कुव्वते बाज़ु होने का शरफ़ हासिल है,

सलाम हो रसूल की एक-लौती बेटी फ़ातेमा (स.) पर,

सलाम हो इमामे हसन (अ.) पर, जो अपने बाबा की अमानतों के रखवाले उन के जानशीन हैं,

सलाम हो इमामे हुसैन (अ.) पर, जिन्होने इन्तहाई खुलूस से राहे खुदा में जान निसार कर दी,

सलाम हो उस पर, जिसने पोशीदा और नुमाया छुपकर आशकार अल्लाह की इताअत व बन्दगी की,

सलाम हो उस पर, जिस के कब्र की मिट्टी ख़ाके शिफ़ा है,

सलाम हो उस पर, जिस के हरम की फ़िज़ा में दुआएँ क़ुबूल होती हैं,

सलाम हो उस पर, कि सिलसिला-ए-इमामत उस की ज़ुर्रीयत से है,

सलाम हो पीसरे ख़त्मी मर्तबत पर,

सलाम हो सय्यदुल अवसिया के फ़र्ज़न्द पर,

सलाम हो फ़ातेमा ज़हरा (स.) के बेटे पर,

सलाम हो ख़दीजतुल कुब्रा के नवासे पर,

सलाम हो सिद्रतुल मुन्तहा के वारिस व मुख़्तार पर,

सलाम हो जन्नतुल मावा के मालिक पर,

सलाम हो ज़म-ज़म व सफ़ावाले पर,

सलाम हो उस पर जो ख़ाक व ख़ून में ग़लता (डूबा) हुआ,

सलाम हो उस पर जिसकी सरकार लूटी गई,

सलाम हो किसावालों की पांचवीं शख्सीयत पर,

सलाम हो सब से बड़े परदेसी पर,

सलाम हो सरवरे शहीदा पर,

सलाम हो उस पर, जो बे नंग व नाम लोगों के हाथों शहीद हुआ.

सलाम हो करबला में आकर बसने वाले पर,

सलाम हो उस पर, जिन पर फ़रिश्ते रोए,

सलाम हो उस पर, जिस की ज़ुर्रीयत पाको पाकीज़ा है,

सलाम हो दीन के सैय्यद व सरदार पर,

सलाम हो उन पर, जो दलाएल व बराहीन (दलील) की आमज-गाह (मन्ज़िल है),

सलाम हो उन पर, जो सरदारों के सरदार इमाम हैं,

सलाम हो चाक गिरेबानों पर,

सलाम हो मुरझाए हुए होटों पर,

सलाम हो कर्ब अन्दोह (रंजो-ग़म) में घिरे हुए चूर-चूर नुफ़ूस पर,

सलाम हो उन रूहों पर, जिनके जिस्मों को धोके से तहे तेग़ किया गया,

सलाम हो बे गोरो-कफ़न जिस्मों पर,

सलाम हो उन जिस्मों पर, धूप की शिद्दत से जिनके रंग बदल गए,

सलाम हो ख़ून की उन धारों पर, जो करबला के दामन में जज़्ब हो गई,

सलाम हो बिखरे हुए आज़ा पर,

सलाम हो उन सरों पर, जिन्हे नैज़ों पर बलन्द किया गया,

सलाम हो उन मुखद्दरात इस्मत (पाक बीबीयों) पर, जिन्हे बेरिदा फिराया गया,

सलाम हो दोनों जहानों के पालनहार के हुज्जत पर,

सलाम हो आप पर और आपके पाको-पाकीज़ा आबाओ अजदाद पर,

सलाम हो आप और आपके शहीद फ़र्ज़न्दों पर,

सलाम हो आप और आपकी नुसरत करनेवाली ज़ुर्रीयत पर,

सलाम हो आप और औपकी कब्र के मुजाविर फ़रिश्तों पर,

सलाम हो इन्तेहाई मज़्लूमियत के साथ क़त्ल होनेवाले पर,

सलाम हो आपके ज़हर से शहीद होनेवाले भाई पर,

सलाम हो अली अकबर पर,

सलाम हो कमसिन शीर-ख्वार पर,

सलाम हो उन नाज़नीन जिस्मों पर जिन पर कोई कपड़ा नहीं रहने दिया गया,

सलाम हो आपके दरबदर कीये जानेवाले खानदान पर,

सलाम हो उन लाशों पर, जो सेहराओं में बिखरी रहीं,

सलाम हो उन पर, जिनसे उनका वतन छुड़ाया गया,

सलाम हो उन पर, जिन्हे बगै़र कफ़न के दफ़नाना पड़ा,

सलाम हो उन सरों पर, जिन्हें जिस्मों से जुदा कर दिया गया,

सलाम हो उस पर, जिसने सब्र व शिकाबाई के साथ अल्लाह की राह में जान कुरबान की,

सलाम हो उस मज़लूम पर, जो बे यारो मददगार था,

सलाम हो पाको पाकीज़ा ख़ाक मे बसनेवाले पर,

सलाम हो बलन्द व बाला क़ुब्बा (गुम्बद) वाले पर,

सलाम हो उस पर, जिसे ख़ुदाए बुज़ुर्ग व बरतर ने पाक रखा,

सलाम हो उस पर, जिसकी खिदमत गुज़ारी पर जिब्रईल को नाज़ था,

सलाम हो उस पर, जिसे मिकाईल ने गहवारे में लोरी दी,

सलाम हो जिसके दुश्मनों ने उसके और उसके अहले हरम के सिलसिले में अपने पैमान को तोड़ा,

सलाम हो उस पर, जिसकी हुरमत पामाल हुई,

सलाम हो उस पर, जिसका ख़ून ज़ुल्म के साथ बहाया गया,

सलाम हो ज़ख्मों से नहानेवालों पर,

सलाम हो उस पर, जिसे प्यास की शिद्दत ने नोके सिना के तल्क़ (कड़वे) घूँट पिलाए गए,

सलाम हो उस पर, जिस को ज़ुल्मो सितम का निशाना भी बनाया गया और उसके खयाम के साथ उसके लिबास को लूट लिया गया,

सलाम हो उस पर, जिसे इतनी बड़ी काएनात में यको तनहा छोड़ दिया गया,

सलाम हो उस पर, जिसे यूँ उरियाँ छोड़ा गया जिसकी मिसाल नहीं मिलती,

सलाम हो उस पर, जिसके दफ़्न में बादीयाँ नशिनों ने हिस्सा लिया,

सलाम हो उस पर, जिसकी शहरग़ काटी गई,

सलाम हो दीन के उस नासिरो मददगार पर, जिसने बग़ैर किसी मददगार के दिफाई जंग लढ़ी,

सलाम हो उस रीशे अकदस पर, जो ख़ून से रंगीन हुई,

सलाम हो आप के ख़ाक आलूद रुख़्सारों पर,

सलाम हो लुटे और नुचे हुए बदन पर,

सलाम हो उस दन्दाने मुबारक पर, जिसकी छड़ी से बेहुरमती की गई,

सलाम हो कटी हुई शहरग़ पर,

सलाम हो नैज़े पर, बलन्द किये जानेवाले सरे अकदस पर,

सलाम हो उन मुकद्दस जिस्मों पर जिनके टुकडे सहरा में बिखर गए,

आक़ा । हमारा सलामे नियाज़ व अदब कुबूल फ़रमाइये और आपके क़ुबे (टीले) के गिर्द परवानावार फ़िदा होनेवाले, आपकी तुरबत को हमेशा घेरे रहनेवाले, आपकी ज़रीहे मुकद्दस का हमेशा तवाफ़ करनेवाले और आपकी ज़ियारत के लिए आनेवाले फ़रिश्तों पर भी हमारा सलाम निछावर हो.

आका । मैं आपके हुज़ूर सलामे शौक का हदीया लिये, कामियाबी और कामरानी की आस लगाए हाज़िर हुआ हूँ, आका । ऐसे ग़ुलाम का अक़ीदत से भरपूर सलाम क़ुबूल कीजीए जो आपकी इज़्ज़त व हुरमत से आगाह, आपकी विलायत में मुख़लिस, आपकी मुहब्बत के वसीले से अल्लाह की तकर्रुब (कुरबत) का शयदा (कुरबान होनेवाला) और आपके दुशमनों से बरी व बेज़ार है, आका । ऐसे आशिक का सलाम क़ुबूल फ़रमाइये जिसका दिल आपकी मुसीबतों के सबब ज़ख़्मों से छलनी हो चुका है, और आपकी याद में खू़न के आँसू बहाता है.

आका । इस चाहनेवाले का आदाब क़ुबूल किजीए जो आपके ग़म में निढ़ाल, बेहाल और बेचैन है.

आका । इस जाँनिसार का हदिया-ए-सलाम क़ुबूल कीजीए जो अगर करबला में आपके साथ होता तो आपकी हिफ़ाज़त के लिए तलवारों से टकरा कर अपनी जान की बाज़ी लगा देता, दिलो जान से आप पर फ़िदा होने के लिए मौत से पंचा आज़माई करता, आपके सामने जंगो जिहाद के जौहर दिखाता, आपके ख़िलाफ बग़ावत करनेवालों के मुकाबले में आपकी मदद करता और अन्जाम कार अपना जिस्मो जान, रूहो माल और आल औलाद सब कुछ आप पर कुर्बान कर देता.

आका । इस जाँनिसार का सलाम क़ुबूल किजीए, जिस की रूह आपकी रूह पर फ़िदा हो, और इस के अहलो अयाल आपके अहलो अयाल पर तसद्दुक.

मौला मैं वाक़ए शहादत के बाद पैदा हुआ, अपनी किस्मत के सबब मैं हुज़ूर (अ.स.) की नुसरत से महरूम रहा, आपके सामने मैदाने कारज़ार में उतरनेवालों में शामिल न हो सका और ना ही मैं आपके दुश्मनों से नबर्द आज़मा (जंग न कर सकना) हो सका.

लिहाज़ा । अब मैं कमाले हसरत व अन्दोह के साथ आप पर टूटनेवाले मसाएब व आलाम पर अफ़सोस व मलाल और तपिशे रंजो ग़म के सबब सुबह व शाम मुसलसल गिरिया व ज़ारी करता रहूँगा.

और । आपके ख़ून की जगह इस कद्र ख़ून के आँसू बहाउँगा के अन्जामकार ग़म व अन्दोह की भट्टी और मुसीबतों के लपकते हुए शोलों में जलकर ख़ाक होजाऊँ और यूँ आपके हुज़ूर अपनी जान का नज़राना पेश करदूँ.

आक़ा । मैं गवाही देता हूँ कि आपने नमाज़ क़ायम करने का हक़ अदा फ़रमाया, ज़कात अदा की, नेकी का हुक्म दिया, बुराई और दुशमनी से रोका, दिलो जान से अल्लाह की इतातअत की, पल फर के लिए भी उस की नाफ़रमानी नहीं की, अल्लाह और उसकी रस्सी से यूँ वाबस्ता रहे कि उसकी रज़ा हासिल करली, हमेशा उसके अहकाम की निगेहदाश्त व पासबानी करते रहे, उसकी आवाज़ पर लब्बैक कही, उसकी सुन्नतों को क़ायम किया, फ़ितनों की भड़कती हुई आग को बुझाया, लोगों को हक़ व हिदायत की तरफ़ बुलाया, उनके लिये हिदायत के रास्तों को रौशन व मुनव्वर कर के वाज़ेह किया और आपने अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने का हक़ अदा कर दिया.

आक़ा । मैं दिलो जान से गवाही देता हूँ की आप हमेशा दिल से अल्लाह के फ़र्माबरदार रहे, आप ने हमेशा अपने जद्दे अमजद (स.) की इत्तेबा और पैरवी की, आपने वालिदे माजिद के इरशादात को सुना और उस पर अमल किया, भाई की वसीय्यत की तेज़ी से तकमील की, दीन के सुतून को बलन्द किया, बग़ावतों का क़ला-कमा (तबाहो बरबाद) किया.

और । सरकशों और बाग़ीयों की सरकोबी की (कुचल दिया), आप हमेशा उम्मत के नासे (मददगार) बन कर रहे, आपने जाँनिसारी की सख़्तीयों को सब्रो तहम्मुल और बुर्दबारी से बरदाश्त किया, फ़ासिकों का जमकर मुक़ाबला फ़रमाया, अल्लाह की हुज्जतों को क़ायम किया, इस्लाम और मुसलमानों की दस्तगीरी की, हक़ की मदद की, आज़माइशों के मौक़े पर सब्रो शकीबाई से काम लिया, दीन की हिफ़ाज़त की और हुदूदे दीन की मुहाफ़िज़त फ़रमाई.

आक़ा । मैं अल्लाह के हुज़ूर गवाही देता हूँ कि आपने मिनारा-ए-हिदायत को क़ायम रख्खा, अद्ल की नश्र (फ़ैलाया) व इशाअत की, दीन की मदद करके उसे ज़ाहिर किया, दीन की तज़हीक (मज़ाक) करनेवालों को रोका और उन्हे क़रार वाक़ई सज़ा दी, सुफ़लों (ज़लीलों) से शरीफ़ों का हक़ लेकर उन्हे पहुँचाया.

और । अद्लो इन्साफ़ का हक़ लेकर उन्हे कमज़ोर और ताक़तवरों में बराबरी रवाँ रखी.

आका । मैं इस बात की भी गवाही देता हूँ कि आप यतीमों के सरपरस्त और उनके दिलों की बहार, ख़ल्के खुदा के लिए बहतरीन पनाहगाह, इस्लाम की इज़्ज़त, अहकामे इलाही का मख़ज़न, इनाम व इकराम का मआदन, अपने जद्दे अमजद और वालिदे माजिद के रास्तों पर चलनेवाले और वसीयत व नसीहत में अपने भाई जैसे थे.

मौला । आपकी शान व सिफ़ात यह है कि आप ज़िम्मेदारियों को पूरा करनेवाले, सायेबे औसाफ़े हमीदा, जूदो करम में मशहूर, शब की तारीकीयों में तहज्जुद गुज़ार, मज़बूत रास्तों को इख़्तियार करनेवाले, ख़ल्के खुदा में सबसे ज़्यादा खुबीयों के मालिक, अज़ीम माज़ी के हामिल, आला हसबो नसब वाले, बलंद मरतबों और बेपनाह मनाक़िब का मर्कज़, पसन्दीदह नमूनए अमल के ख़ालिक, मिसाली ज़िन्दगी बसर करनेवाले, बावक़ार, बुर्दबार, बलंद मर्तबा, दरिया दिल, दानाओ व बीना, साहेबे अ़ज़्म व जज़्म, ख़ुदा शनास रहबर, ख़ौफ व ख़शियत और सोज़ो तपिश रखनेवाहे, खुदा को चाहने और उसकी बारगाह में सर झुकानेवाले.

आप । रसूले अक्रम (स.) के फ़र्ज़न्द, क़ुरआन के बचानेवाले, उम्मत के मददगार, इताअते इलाही में जफ़ा कश, अहद व मीसाक़ के पाबन्द व मुहाफ़िज़, फ़ासिकों के रास्तों से दूर रहनेवाले, हुसूले मक़सद के लिए दिलो जान की बाज़ी लगानेवाले और तूलानी रूकूअ व सुजूद अदा करनेवाले हैं.

मौला । आपने दुनिया से इस तरह मुँह मोड़ा और यूँ बेएतेनाई दिखाई जैसे दुनिया से हमेशा के लिए कूच करनेवाले करते हैं. दुनिया से खौफ़ज़दा लोग उसे देखते हैं, आपकी तमन्नाएँ और आरज़ूएँ दुनिया से हटी हुई थी, आपकी हिम्मत व कोशिश उसकी ज़ीनतों से बेनियाज़ थी और आपने तो दुनिया के चेहरे की तरफ़ कभी उचटती हुई निगाह भी नही डाली.

अलबत्ता । आखेरत में आपकी दिलचस्पी शोहरे आफ़ाक है, यहाँ तक की वह वक़्त आया जब जौरो सितम ने लम्बे-लम्बे डग भर कर सरकशी शुरू करदी, ज़ुल्म तमामतर हथीयार जमा करके सख़्त जंग के लिए आमादा हो गया और बाग़ीयों ने अपने तमाम साथियों को बुला भेजा. उस वक़्त आप, अपने जद के हरम में पनाहगुज़ी ज़ालिमो से अलग-थलग, मस्जिदों – मेहराब के साये में लज़ज़्त और ख्वाहिशात से बेज़ार बैठे थे. आप अपनी ताकत और इमकानात के मुताबिक दिलो ज़बान के ज़रिये बुराइयों से नफ़रत का इज़हार करते और लोगों को बुराइयों से रोकते थे, मगर फिर आपके इ़ल्म का तक़ाज़ा हुआ कि आप खुल्लम-खुल्ला बैअत से इन्कार करें और फुज्जार के ख़िलाफ़ जिहाद के लिए उठ खड़े हों.

चुनांचे आप अपने अहलो-अयाल, अपने शीयों, चाहनेवालों और जाँनिसारों को लेकर रवाना हो गए और अपनी इस मुख़्तसर लेकिन बाअज़्म व हौसला जमाअत की मदद से, हक़ और दलाएल व बराहीन अच्छी तरह वाज़ेह कर दिया लोगों को हिकमत और मुइज़े हसना के साथ अल्लाह की तरफ़ बुलाया, हुदूदे इलाही के क़याम और अल्लाह की इताअत का हुक़्म दिया और लोगों को ख़बाअस व बेहूदगायों और सरकशी से रोका लेकिन लोग जु़ल्मो सितम के साथ आप के मुक़ाबले पर डट गए, ऐसे आड़े वक़्त पर भी, आपने पहले तो उनको ख़ुदा के ग़ज़ब से डराया और उन पर हुज्जत तमाम की फ़िर उन से जिहाद किया. तब उन्होने आप से किया हुआ अहद तोड़ा और आपकी बैअत से निकल कर आपके रब और आपके जद्दे अमजद को नाराज़ किया और आपके साथ जंग शुरू कर दी.

लिहाज़ा आप भी मैदाने कारज़ार में उतर आए, आपने फ़ुज्जार के लश्करों को रौंद डाला, ज़ुल्फ़ेक़ार खेंच कर जंग के गहरे ग़ुबार के बादलों में घुस कर ऐसा हमला किया कि लोगों को अली की जंग याद आगई. दुश्मनों ने आपकी साबित क़दमी, दिलेरी और बेबाकी (निडरता) देखी तो उनका पित्ता पानी हो गया और उन्होने मुक़ाबले के बजाए मक्कारी से काम लिया और आपके क़त्ल के लिए फ़रेब के जाल बिछा दिये और मलऊन उमरे साद ने लशकर को हुक़्म दिया कि वह आप पर पानी बन्द कर दे और आप तक पानी पहुँचाने के तमाम रास्तों की नाकाबन्दी करदे, फिर दुशमन ने तेज़ जंग शुरू करदी और आप पर पय-दर-पय हमले करने लगा जिसके नतीजे में उसने आपको तीरों और नैज़ों से छलनी कर दिया और इन्तहाई दरिन्दगी के साथ आप को लूट लिया. उसने ना तो आपके सिलसिले में किसी अहदो पैमान की परवा की और ना ही आपके दोस्तों के क़त्ल और, आप और आपके अहले-बैत (अ.) का सामान ग़ारत के सिलसिले में किसी गुनाह की फ़िक्र की और आपने मैदाने जंग में सब से आगे बढ़ कर मसाएब व मुश्किलात को यूँ झेला की आसमान के फ़रिश्ते भी आपके सब्र, इस्तेक़ामत पर दंग रह गए, फिर दुश्मन हर तरफ़ से आप पर टूट पड़ा, उसने आपको ज़खमों से चूर-चूर करके निढ़ाल कर दिया और दम लेने तक की फ़ुरसत न दी यहाँ तक की आपका कोई नासिरो मददगार बाक़ी न रहा और आप इन्तेहाई सब्रो शिकाबाई से सब कुछ देखते और झेलते हुए यको तनहा अपनी मुक़द्दराते इस्मतो तहारत और बच्चों को दुशमन के हमले से बचाने में मसरूफ रहे, यहाँ तक कि दुशमन ने आपको घोड़े से गिरा दिया और आप ज़खमों से पाश-पाश जिस्म के साथ ज़मीन पर गिर पड़े फिर वह तलवार लेकर टूट पड़ा और उसने घोड़ों की सुमों से आपको पामाल कर दिया, यह वह वक़्त था जब आपकी जबीने अक़दस पर मौत का पसीना आगया और रूह निकलने के सबब आपका जिस्मे नाज़नीं दाएँ-बाएँ सुकड़ने और फ़ैलने लगा, अब आप इस मोड़ पर थे जहाँ इन्सान सब कुछ भूल जाता है, ऐसे में आपने अपने ख़याम और घर की तरफ़ आखरी बार हसरत भरी निगाह डाली और आपका वफ़ादार घोड़ा तेज़ी से हिनहिनाता और रोता हुआ सुनानी सुनाने के लिए ख़याम की तरफ़ रवाना हो गया.

जब मुक़द्दराते इस्मतो तहारत ने आपके ज़ुहजनाह को ख़ाली और आपकी ज़ीन को उल्टा हुआ देखा तो एक कोहराम मच गया और वह ग़म की ताब न लाते हुए ख़ैमों से निकल आए, उन्हो ने अपने बाल चेहरों पर बिखरा लिए और अपने रुख़्सारों पर तमाचे मारते हुए अपने बुजु़र्गों को पुकार-पुकार कर नौहा व गिरिया शुरू कर दिया क्यूँ कि अब इस संगीन सदमे के बाद उनको इज़्ज़त – एहतेराम की निगाहों से नहीं देखा जा रहा था और सब के सब ग़म से निढ़ाल आपकी शहादतगाह की तरफ़ जा रहे थे.

अफ़सोस । शिम्र मलऊन आपके सीने पर बैठा हुआ और आपके गुलूए मुबारक पर अपनी तलवार रखे हुए था, वह कमीना आपकी रीशे अक़दस को पकड़े हुए अपनी कुन्द तलवार से आपको ज़िब्हा कर रहा था, यहाँ तक कि आपके होशो हवास साकिन होगए, आपकी सांस मध्धम पड़ गई और आपका पाको-पाकीज़ा सर नैज़े पर बलन्द कर दिया गया, आपके अहलो-अ़याल को ग़ुलामों और कनीज़ों की तरह कै़द कर लिया गया और उनको आहनी (लोहे की) ज़ंजीरों में जकड़ कर इस तरह बेकजावा ऊँटों पर सवार कर दिया गया कि दिन की बेपनाह गर्मी उनके चेहरों को झुलसाए दे रही थी. बेग़ैरत दुशमन उनको जंगलों और बियाबानों में ले जा रहा था और उनके नाज़ुक हाथों को गर्दनों के पीछे सख्ती से बांध कर गलियों और बाज़ारों में उनकी नुमाइश कर रहा था.

लानत हो उस फ़ासिक़ गिरोह पर जिसने आपको क़त्ल करके इस्लाम को क़त्ल और नमाज़, रोजे़ को मुअत्तल (ख़त्म) कर दिया. अहकाम व क़वानीने इलाही की नाफ़रमानी की, ईमान की बुनियादों को हिला दिया, आयाते क़ुरआनी में रद्दो बदल की और बग़ावतो दुशमनी की दलदल में धसता ही चला गया.

आपकी शहादत पर अल्लाह का रसूल सरापा दर्द बन गया, किताबे ख़ुदा को कोई पूछनेवाला न रहा, आप पर जफ़ा करनेवालों का हक से रिश्ता टूट गया, आप के उठजाने से तकबीरो तहलील, हरामो हलाल, तन्ज़ीलो तावील पर परदे पड़ गए.

इसके अलावा आपके ना होने से दीन में क्या-क्या बदला गया, कैसे-कैसे तग़य्युरात अमल में लाए गए, मुल्हेदाना (काफ़ेराना) नज़रियों को फ़रोग़ मिला, अहकामे शरीअत मुअत्तल कीए गए, नफ़सानी ख्वाहिशों की गिरिफ़्त मज़बूत हुई, गुमराहियों ने ज़ोर पकड़ा, फितनों ने सर उठाया और बातिल की बन आई फिर हुआ यह की नौहागरों ने आपके जद्दे अमजद की मज़ार पर आहो बुका और गिरियाओ ज़ारी के साथ यूँ मरसिया ख़्वानी की.

अल्लाह के रसूल । आपका बेटा, आपका नवासा क़त्ल कर डाला गया, आपका घर लूट लिया गया, आपकी ज़ुर्रीयत असीर हुई, आपकी इतरत पर बड़ी मुसीबतें पडी. यह सुन कर पैग़म्बर (स.) को बहुत सदमा पहुँचा, रसूल (स.) के जिगर ने ख़ून के आँसू बरसाए, मलाएका ने उन्हें पुर्सा दिया, अम्बिया ने ताज़ीयत की और

मौला । आपकी मादरे गिरामी जनाबे फ़ातेमा ज़हरा (स.) पर क़यामत टूट पड़ी, मलाएका कतार दर कतार आपके वालिदे गिरामी के हुज़ूर ताज़ीयत के लिए आए, आ़ला इल्लीय्यीन (बड़े लोगों) में सफ़्हे मातम बिछ गई, हूरें अपने रुख़्सारों पर तमाचे मार-मार कर निढ़ाल हो गईं, आसमान और आसमानी मख़लूक जन्नत और जन्नत के दरो दीवार, बलन्दीयों और पस्तीयों, समन्दरों और मछलियों, जन्नत के ख़ुद्दाम व सुक्कान, ख़ानए काबा और मकामे इब्राहीम, मशअरुल हराम व हिल्लो हरम सब ने मिल कर आप (अ.) की मुसीबत पर ख़ून के आँसू बहाए.

बारे इलाहा । इस बाबरकत व बाइज़्ज़त जगह के तुफ़ैल मोहम्मद व आले मोहम्मद (स.) पर दुरूद भेज, मुझे इन के साथ मेहशूर फ़रमा और उनकी शिफ़ाअत के सबब मुझे जन्नत अता कर.

बारे इलाहा । ऐ जल्द हिसाब करनेवाले, ऐ सबसे करीम हस्ती और ऐ सबसे बड़े हाकिम, मैं तेरी बारगाह में तमाम जहानों की तरफ़ तेरे रसूल (स.) और आखरी नबी (स.) हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.), इनके भाई, इब्ने अम (चचा के बेटे), तवाना बाज़ू और दानिश व आगही के मरक़ज़ अमीरुल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब (अ.), तमाम जहानों की ख़वातीन की सरदार – हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.), परहेज़गारों के मुहाफ़िज़ इमाम हसन ज़की (अ.), शोहदा के सैय्यदो सरदार – हज़रत अबी अब्दिल्लाह अल-हुसैन (स.) और इनकी मक़तूल औलाद और मज़लूम इतरत, आबिदों की ज़ीनत हज़रत अली बिन हुसैन (अ.) जोयाए हक़ (हक़ को ढूँढने वाले) लोगों के मरकज़े तवज्जोह हज़रत मोहम्मद बिन अली (अ.), सबसे बड़े सादिक़ुल क़ौल हज़रत जाफ़र बिन मोहम्मद (अ.) दलीलों को ज़ाहिर करनेवाले हज़रत मूसा बिन जाफ़र (अ.), दीन के मददगार हज़रत अली बिन मूसा (अ.), पैरोकारों के रेहनुमा हज़रत मोहम्मद बिन अली (अ.) सबसे बड़े पारसा (पाक़) हज़रत अली बिन मोहम्मद (अ.), हिदायतों की मज़बूत कड़ी हज़रत हसन इब्ने अली (अ.) और सिलसिला-ए-नबुव्वत व इमामत के तमाम बुज़ुर्गों के वारिस और ऐ अल्लाह । तेरी तमाम मख़लूक पर तेरी हुज्जत (क्यूँ की यह ज़्यारते नाहीया खुद इमामे ज़माना – अ.त.फ.श. से सादिर हूई है इस लिए आपने ख़ुद अपना नामे नामी नहीं लिया है) का वास्ता देता हूँ कि तू मोहम्मद (स.) व आले मोहम्मद (स.) पर जो आले ताहा व यासीन भी हैं, और सच्चे और नेकू कार भी, दुरूद व रहमत नाज़िल फ़रमा और मुझे रोज़े क़यामत उन लोगों मे शामिल फ़रमा जिनको उस दिन अमन व इत्मेनान हासिल होगा और वह इस परेशानीवाले दिन भी खुश व खुर्रम होंगे और जिन्हे जन्नत की ख़ुशख़बरी सुनाई जाएगी.

बारे इलाहा । ऐ अरहमुर्राहेमीन, अपनी रहमत के सदक़े में मेरा नाम मुसलमानों मे लिख ले, मुझे स्वालेह और नेकू कार लोगों मे शामिल फ़रमाले, मेरे पसमानिन्दगान (गुज़रे हुए) और बादवाली नसलों मे मेरा ज़िक्र सच्चाई और भलाई के साथ जारी रख, बाग़ियों के मुक़ाबले में मेरी नुसरत फ़रमा, हसद करनेवालों के मकरो शर से मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा, ज़ालिमों के हाथों को मेरी जानिब बढ़ने से रोक दे, मुझे आ़ला इल्लीय्यीन में बाबरकत पेशवाओं और अइम्मा-ए-अहलेबैत (अ.) के जवार में उन अम्बिया-ए-सिद्दीक़ीन, शोहदा और सॉलेहीन के साथ जमा कर जिन पर तूने अपनी नेअमतें नाज़िल फ़रमाई हैं.

परवरदिगार । तुझे क़सम है तेरे मासूम नबी की, तेरे हतमी अहकाम की, तेरे मुकर्रहात, मनेअयात की और उस पाको पाकीज़ा कब्र की जिसके पहलू में मासूम, मक़तूल और मज़लूम इमाम दफ़्न हैं, कि तू मुझे दुनिया के ग़मों से निजात अता फ़रमा, मेरे मुक़द्दर की बुराई और शर को मुझ से दूर कर दे और मुझे ज़हरीली आग से बचाले.

बारेइलाहा । तू अपनी नेअमत के तुफ़ैल इज़्ज़तो आबरू मरहमत फ़रमा, मुझे अपनी तक़सीम की हुई रोज़ी पर राज़ी रख, मुझे अपने करमो, जूदो, सख़ा से ढ़ांक ले की फ़ुरसत ना मिले और मुझ पर इतना फ़ज़्लो करम कर कि मैं तमाम मख़लूकात से बेनियाज़ हो जाऊँ. मेरे पालनेवाले, मैं तुझ से नफ़ा बख़्श इल्म, तेरे जानिब झुकनेवाले दिल, पुख़्ता ईमान, पाकीज़ा और मुख़लिसाना अमल, मिसाली सब्र और बेपनाह अज्रो सवाब का तलबगार हूँ.

मेरे अल्लाह । तूने मुझ पर जो फ़रावान नेअमतें नाज़िल फ़रमाई हैं, तूही मुझे उनके बारे में अपने शुक्रो सिपास की तोफ़ीक अता फ़रमा और उसके नतीजे में मुझ पर अपने अहसानो करम में इज़ाफ़ा फ़रमा, लोगों के दरमियान मेरे क़ौल में तासीर अता कर, मेरे अमल को अपनी बारगाह में बलन्दी अता फ़रमा, मुझे ऐसे बना दे कि नेकीयों की पैरवी की जाने लगे और मेरे दुशमन को तबाहो बरबाद कर दे.

ऐ जहानों के पालनेवाले । तू अपने बेहतरीन बन्दों यानी मोहम्मद व आले मोहम्मद (स.) पर शबो रोज़ अपनी रहमतें व दुरूद नाज़िल फ़रमा और मुझे बुरे लोगों के शर से महफ़ूज़ कर दे और गुनाहों से पाक फ़रमा दे, मुझे सुकूनो क़रार की जगह यानी जन्नत में जगह दे और मुझे और मोमेनीन व मोमिनात में से मेरे तमाम भाईयों और बहनों और अइज़्ज़ा व अक़रबा को बख़्श दे.

ऐ सब रहम करनेवालों से ज़्यादा रहम करनेवाले, अपनी रहमत के तसद्दुक मेरी इल्तेजा को क़ुबूल फ़रमा ले.

Man Hindi i Love it. I am dying to learn it. Can any one tell me from where or at least send me an alphabet scheme of it?

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Beautiful !!

yay hindi !!!! i wish i could write it as neat as it looks on screen

सलाम हो उन मुकद्दस जिस्मों पर जिनके टुकडे सहरा में बिखर गए,

आक़ा । हमारा सलामे नियाज़ व अदब कुबूल फ़रमाइये और आपके क़ुबे (टीले) के गिर्द परवानावार फ़िदा होनेवाले, आपकी तुरबत को हमेशा घेरे रहनेवाले, आपकी ज़रीहे मुकद्दस का हमेशा तवाफ़ करनेवाले और आपकी ज़ियारत के लिए आनेवाले फ़रिश्तों पर भी हमारा सलाम निछावर हो....

इस जाँनिसार का हदिया-ए-सलाम क़ुबूल कीजीए जो अगर करबला में आपके साथ होता तो आपकी हिफ़ाज़त के लिए तलवारों से टकरा कर अपनी जान की बाज़ी लगा देता, दिलो जान से आप पर फ़िदा होने के लिए मौत से पंचा आज़माई करता, आपके सामने जंगो जिहाद के जौहर दिखाता, आपके ख़िलाफ बग़ावत करनेवालों के मुकाबले में आपकी मदद करता और अन्जाम कार अपना जिस्मो जान, रूहो माल और आल औलाद सब कुछ आप पर कुर्बान कर देता.

:cry: :cry:

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Whatever that texts says-it looks absolutely beautiful.

(bismillah) Salaam, this text is called Hindi. Wassalaam

Man Hindi i Love it. I am dying to learn it. Can any one tell me from where or at least send me an alphabet scheme of it?

(bismillah) Salaam, I know hindi quite well. Maybe i can help. Wassalaam

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